खाद संकट और फार्मर आईडी को लेकर जिला कांग्रेस अध्यक्ष तरुण बाहेती का हमला, फार्मर आईडी से किसान परेशान -मंदिर माफी, पट्टाधारकों और संयुक्त खाताधारकों के सामने खड़ा हुआ संकट, बड़ा सवाल हैं की आखिर पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष जिले में यूरिया और डीएपी कम क्यों मंगाया ?....
Updated : May 19, 2026 05:36 PM
रामेश्वर नागदा नीमच
राजनीति
नीमच। खरीफ सीजन शुरू होने से पहले जिले में खाद संकट और फार्मर आईडी की अनिवार्यता को लेकर राजनीति तेज हो गई है। जिला कांग्रेस अध्यक्ष तरुण बाहेती ने भाजपा सरकार पर किसानों को परेशान करने का आरोप लगाते हुए कहा कि पहले ही जिले में यूरिया और डीएपी खाद का बड़ा संकट है और अब सरकार की बिना तैयारी के थोपी गई 'फार्मर आईडी' व्यवस्था सभी किसानों के लिए नई आफत बन गई है। सरकार ने नियम कर दिया है कि अब किसी भी प्रकार का खाद और शासकीय योजनाएं बिना फार्मर आईडी के नहीं मिलेगी। समस्या है की किसान इस व्यवस्था को समझ ही नहीं पा रहा है और इसके कड़े नियमों से इसमें मंदिर1 माफी, वन व राजस्व पट्टाधारकों और डूब क्षेत्र के किसानों के सामने खाद का संकट खड़ा हो गया है, तो वहीं संयुक्त खातों में आपसी विवाद और मनमुटाव की आशंका बढ़ गई है। इसके साथ ही, महिला खाताधारकों और बाहर रहने वाले किसानों के लिए बार-बार रिकॉर्ड अपडेट कराने और दफ्तरों के चक्कर काटने की जटिलता ने उनकी परेशानी और आर्थिक बोझ को और अधिक बढ़ा दिया है। उन्होंने कहा कि सरकार एक तरफ खाद की सप्लाई कम कर रही है और दूसरी तरफ डिजिटल प्रक्रिया के नाम पर किसानों को दफ्तरों और ई-मित्र केंद्रों के चक्कर कटवा रही है।
जिला कांग्रेस अध्यक्ष तरुण बाहेती ने सोमवार को जारी बयान में कहा कि सरकार ने इस साल खरीफ सीजन के लिए जिले में यूरिया की मांग केवल 13 हजार 500 मीट्रिक टन तय की है, जबकि पिछले वर्ष क़ृषि विभाग ने खरीफ में जिले में 21 हजार 158 मीट्रिक टन यूरिया का वितरण किया था तों भी पूरे वर्ष भर यूरिया की मारामारी रही। विभाग यह दावा कर रहा हैं की वर्तमान में 6 हजार मिट्रिक टन यूरिया जिले उपलब्ध है। लेकिन इस वर्ष की जो यूरिया की मांग करी है वह कितना आएगा यह तय नहीं है जो की जिले की मांग के अनुरूप नाकाफी साबित होगा। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार जानबूझकर मांग कम दिखाकर खाद की कृत्रिम कमी पैदा कर रही है। उन्होंने कहा कि यही स्थिति डीएपी खाद की भी है। पिछले साल जिले में 6 हजार 650 मीट्रिक टन डीएपी वितरित हुआ था, जबकि इस बार मांग घटाकर केवल 3 हजार 745 मीट्रिक टन तय कर दी गई है। वर्तमान स्टॉक मात्र 2 हजार 115 मीट्रिक टन बताया जा रहा है। ऐसे में खरीफ सीजन के दौरान किसानों को पर्याप्त खाद मिल पाना मुश्किल दिखाई दे रहा है। बाहेती ने कहा कि सरकार के पास न तो खाद उपलब्ध कराने की ठोस योजना है और न ही किसानों की परेशानी दूर करने की व्यवस्था हैं। श्री बाहेती ने आरोप लगाया कि जिले में खाद संकट का फायदा उठाकर कालाबाजारी शुरू हो गई है। सिंगोली क्षेत्र सहित कई इलाकों में यूरिया निर्धारित दर से अधिक कीमत पर बेचा जा रहा है। उन्होंने कहा कि किसानों से 500 से 600 रुपए तक में यूरिया की बोरी बेची जा रही है। प्रशासन और कृषि विभाग इस स्थिति पर आंखें मूंदे बैठे हैं।
फार्मर आईडी बनी किसानों के लिए नई मुसीबत - कांग्रेस जिला अध्यक्ष ने कहा कि खाद वितरण के लिए अनिवार्य की गई फार्मर आईडी किसानों के लिए राहत नहीं, बल्कि परेशानी का कारण बन गई है। ग्रामीण क्षेत्रों के छोटे और सीमांत किसानों को खाद और बीज की मांग दर्ज कराने के लिए बार-बार ई-मित्र, साइबर कैफे और कंप्यूटर केंद्रों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि गांवों में तकनीकी संसाधनों की कमी और नेटवर्क समस्या के कारण किसान घंटों लाइन में खड़े रहते हैं। कई बार सर्वर डाउन होने या रिकॉर्ड लिंक नहीं होने के कारण किसानों की प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाती और उन्हें बिना खाद के लौटना पड़ता है। इससे किसानों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ भी बढ़ रहा है। मंदिर माफ़ी जमीन,पट्टाधारकों और वन अधिकार धारकों की बढ़ी परेशानी - तरुण बाहेती ने कहा कि मंदिर माफी, राजस्व पट्टा, वन अधिकार पट्टा लीज की जमीन, डूब क्षेत्र वाले किसानों के सामने सबसे बड़ी समस्या खड़ी हो गई है। इनपर खेती करने वालों की फार्मर आईडी नहीं बनेगी। इन जमीनों पर खेती करने वाले किसानों को खाद प्राप्त करने के लिए पहले ई-मित्र केंद्र पर आवेदन करना होगा, उसके बाद इनकी फाइल एसडीएम कार्यालय से स्वीकृत होगी। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में पहले ही प्रशासनिक प्रक्रियाएं धीमी रहती हैं। ऐसे में यदि सर्वर डाउन रहा या कार्यालय में समय पर अनुमति नहीं मिली तो किसान समय पर खाद नहीं ले पाएंगे और उनकी फसलें प्रभावित होंगी। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने बिना तैयारी के डिजिटल व्यवस्था लागू कर किसानों को परेशानी में डाल दिया है।
संयुक्त खातों में बढ़ सकते हैं विवाद - कांग्रेस जिला अध्यक्ष ने कहा कि संयुक्त खातेदारों के लिए भी यह व्यवस्था बड़ी समस्या बन सकती है। यदि किसी जमीन पर तीन भाइयों या परिवार के अन्य सदस्यों का संयुक्त नाम दर्ज है, तो खाद लेने के लिए एक खातेदार को अन्य खातेदारों की लिखित सहमति लेनी होगी। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में पहले से ही जमीन को लेकर विवाद होते रहते हैं। ऐसे में हर बार लिखित अनुमति लेने की प्रक्रिया परिवारों में नए विवाद और मनमुटाव को जन्म दे सकती है। सरकार को इस व्यवस्था में व्यावहारिक सुधार करना चाहिए।
महिलाओं और बाहर रहने वाले खाताधारकों की दिक्कत - श्री बाहेती ने कहा कि महिलाओं के नाम दर्ज जमीन और बाहर नौकरी या व्यवसाय करने वाले खाताधारकों के लिए भी फार्मर आईडी व्यवस्था परेशानी बन गई है। महिला खाताधारकों को हर बार किसी अन्य व्यक्ति को नॉमिनेट करना पड़ रहा है। वहीं बटाईदार और हिस्सेदार बदलने की स्थिति में हर साल फार्मर आईडी में बदलाव करवाना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि गांवों में हर किसान तकनीकी रूप से सक्षम नहीं है। ऐसे में बार-बार रिकॉर्ड अपडेट करवाना किसानों के लिए मुश्किल और खर्चीला साबित हो रहा है। जिला कांग्रेस अध्यक्ष तरुण बाहेती ने कहा की सरकार बार-बार किसानों के हितैषी होने का दावा करती है, लेकिन जमीनी स्थिति इसके बिल्कुल विपरीत है। खाद की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने से खरीफ सीजन में किसानों की खेती प्रभावित होगी और उत्पादन पर भी असर पड़ेगा। बाहेती ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि सरकार ने जल्द खाद की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित नहीं की, कालाबाजारी पर रोक नहीं लगाई और किसानों को फार्मर आईडी के नाम पर परेशान करना बंद नहीं किया, तो कांग्रेस सड़कों पर उतरकर उग्र आंदोलन करेगी।
जिला कांग्रेस अध्यक्ष ने रखीं ये प्रमुख मांगें - कांग्रेस ने सरकार से मांग की है कि फार्मर आईडी को लेकर गांव-गांव जागरूकता अभियान चलाया जाए। कृषि विभाग ग्रामीण क्षेत्रों में खुद शिविर लगाकर किसानों की फार्मर आईडी बनाएं और किसानों को सरल भाषा में पूरी प्रक्रिया समझाए ताकि किसान किसी दलाल या ठगी का शिकार न हों। इसके अलावा हर ग्राम पंचायत और सोसायटी स्तर पर मुफ्त कृषि सहायता केंद्र स्थापित किए जाएं, जहां सरकारी कर्मचारियों के माध्यम से किसानों की फार्मर आईडी बनाई जाए और खाद की डिमांड दर्ज की जाए। किसानों से किसी प्रकार का शुल्क नहीं लिया जाए। कांग्रेस ने मंदिर माफी की जमीन, राजस्व वन पट्टा धारक, संयुक्त खाताधारकों, महिला किसानों और डूब क्षेत्र के किसानों के लिए नियमों को सरल बनाने की मांग भी की है। बार-बार सहमति और एसडीएम कार्यालय की अनुमति जैसी शर्तों को हटाकर सेल्फ डिक्लेरेशन के आधार पर खाद उपलब्ध कराया जाए। इसके साथ ही तकनीकी कारणों से जिन किसानों की फार्मर आईडी लिंक नहीं हो पाई है, उन्हें ऋण पुस्तिका, पावती या अन्य पारंपरिक दस्तावेजों के आधार पर खाद वितरण किया जाए। सर्वर डाउन होने की स्थिति में सोसायटियों पर ऑफलाइन खाद वितरण व्यवस्था भी चालू रखी जाए।
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