मिट्टी की सेहत सुधरेगी, तो बढ़ेगा उत्पादन, कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को दिया संतुलित खाद का मंत्र….
आयोजन
बंशीलाल धाकड़ राजपुरा
Updated : April 30, 2026 05:47 PM
चित्तौड़गढ़ :- कृषि विज्ञान केन्द्र द्वारा विशेष जागरूकता अभियान, उर्वरको का संतुलित उपयोग पर वैज्ञानिक खेती की तकनीकी जानकारी जागरूकता किसानों को देने के लिए विशेष जागरूकता कार्यक्रम संतुलित उर्वरकों के उपयोग हेतु आयोजित किये जा रहे है। डॉ प्रताप सिंह, कुलगुरू, महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, उदयपुर ने नव युवक किसानों को खेती की तकनीकी जानकारी देते हुए बताया कि किसानों को मिटटी के स्वास्थ्य और घटती उर्वरता पर चिता जताते हुए संतुलित उर्वरक उपयोग अपनाने पर जोर दिया। वर्तमान में रासायनिक उर्वरको जैसे यूरिया और डीएपी का अधिक तथा असंतुलित उपयोग से मिट्टी की उत्पादन क्षमता कम हुई है, जिसका मुख्य कारण पोषक तत्वों का असतुलन उपयोग मुख्य कारण बन रहा है। इससे न केवल निद्री की दीर्घकालीन उर्वरता प्रभावित हो रही है, बल्कि उर्वरकों की उपयोग दक्षता भी घट रही है, तथा किसानों के खेतों की मिटटी की सेहत भी खराब एवं उत्पादन लागत बढ़ रही है। तथा जिससे किसानों की फसलों के उत्पादन पर भी विपरित प्रभाव पड़ रहा है। डॉ आर एल सोनी, निदेशक प्रसार, प्रसार शिक्षा निदेशालय, महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, उदयपुर ने किसानों को अपने खेत की मिटटी जांच करवारकर (मृदा स्वास्थ्य कार्ड) मिटटी परीक्षण आधारित उर्वरक उपयोग अपनाने और फसल की आवश्यकता के अनुसार संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन के आधार पर फसलो में संतुलित खाद प्रयोग करने की सलाह दी किसानों को जैविक खाद, कम्पोस्ट, वर्मी कम्पोस्ट का अधिक उपयोग करने एवं प्राकृतिक खेती को भी अपनाने का किसानो से आव्हान किया। डॉ रतन लाल सोलंकी वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष ने किसानों को विभिन्न जीवाणु खाद- एजोक्टोबेक्टर राइजोबियम, पी एस बी. कल्चर को बीज उपचारित करने का तरीका बताया एवं इफको उत्पाद के बारे में बताया साथ ही नेनो यूरिया एवं नैनो डीएपी के उपयोग पर जोर दिया। उन्होंने किसानों को उर्वरको की सही मात्रा, उपयोग का उचित समय और I वैज्ञानिक विधियो की विस्तृत जानकारी दी। कार्यक्रम के दौरान दीपा इन्दौरिया कार्यकम सहायक ने किसानों को मृदा परीक्षण के आधार पर ही उर्वरको के उपयोग की सलाह दी और जैविक खाद वर्मीकम्पोस्ट बनाने की प्रक्रिया समझाई। वैज्ञानिक तरीके से मिटटी नमूना लेने का तरीका तथा मृदा स्वास्थ्य पर प्रकाश डाला। संजय कुमार धाकड, तकनीकी सहायक ने फसल चक अपनाने और हरी खाद के उपयोग को बढ़ावा देने की आवश्यकता बताई, जिससे मिटटी की गुणवत्ता बनी रहे। कार्यक्रम में जिले के प्रगतिशील युवा किसानों ने भाग लिया।